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मध्यप्रदेश का सांस्कृतिक परिदृश्यकला विशेष / 01
आँखों देखाजो देखा, वही लिखा

चित्रों में जीवन।
जो आँखों देखा, वही लिखा।

आँखों देखा / पढ़ने की सूची

भोपाल

भोपाल से जुड़ी खबरें और फीचर।

कलाकार / झाबुआ से भोपाल

भूरी बाई का गाँव, कागज़ पर

जंगल, गुदना, हाट और हवाई जहाज़—पिटोल की चित्रकार की दुनिया में पुरानी स्मृति और नया जीवन साथ दिखाई देते हैं।

10 मिनट का पाठ
चित्रभाषा / पतंगढ़

पेड़, पक्षी और जंगढ़ की चित्रभाषा

प्रकृति, कहानियाँ और आधुनिक जीवन—गोंड चित्रकला के रंगीन विस्तार को पतंगढ़ और भोपाल के संदर्भ में पढ़िए।

10 मिनट का पाठ
कार्यक्रम रिपोर्ट / 11 फरवरी 2026

रोशनी व्याम और Khatra की साझा दीवार

वॉल आर्ट इंडिया 2026 के भोपाल कार्यक्रम में रोशनी व्याम और Khatra को एक साथ म्यूरल बनाने के लिए आमंत्रित किया गया।

9 मिनट का पाठ
रिपोर्ट / 2 अप्रैल 2025

पाँच भाषाओं की लोककथाएँ दर्ज

2 अप्रैल 2025 के संसदीय उत्तर में मध्यप्रदेश के जनजातीय शोध संस्थान के भाषा और सांस्कृतिक दस्तावेज़ीकरण का ब्यौरा आया।

9 मिनट का पाठ
भोपाल / वन

वन विहार पॉम पेंटिंग: 50 छात्र, बाघ सप्ताह

27 जुलाई 2026, 19:11। बाघ सप्ताह 22–28 जुलाई, अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस। विहार वीथिका, प्रातः 10 से 12। संचालक श्री विजय कुमार। स्कूल: सेंट जॉर्ज, जवाहर लाल, गुरूनानक पब्लिक। कक्षा 9 से 12। विषय: मध्यप्रदेश में बाघ। 50 प्रतिभागी एवं शिक्षक। पुरस्कार प्रथम-द्वितीय-तृतीय; चार सांत्वना—सहायक संचालक डॉ. रूही हक। 28 जुलाई 7–9 बजे पक्षी अवलोकन—उस शीट की भविष्य पंक्ति। चित्र प्रतियोगिता का फ्रेम है, 50 हथेलियाँ नहीं।

11 मिनट का पाठ
तारीख वाली संस्कृति

आईजीआरएमएस: पारंपरिक घर, पांडुलिपि, समुद्र

5–8 अगस्त के सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रतिनिधियों ने मानव संग्रहालय के खुले परिसर, पारंपरिक आवास और जीवित परंपराओं के साथ तीन विशेष प्रदर्शनियां देखीं।

10 मिनट का पाठ
भोपाल / रोशनी

संगीत संध्या: आवाज़ और दीवार साथ

21 जून 2026, 20:45। संस्कृति विभाग, 14 अंचल। शासकीय संगीत एवं ललित कला महाविद्यालय सहित संस्थान। भोपाल जनजातीय संग्रहालय, संगीत संध्या। भरतनाट्यम: पुणे की सुश्री स्मिता महाजन; शिष्याएँ हार्दिका फड़के, सिद्धि पाटिल, सिद्धि तार्डे। क्रम: विनायक स्तुति, मल्लारी, देवी कौतुकम्, दो पदम, तिल्लाना राग देश। ग्रंथ ‘मार्गम उन्मेष’—स्वयं रचित 75 रचनाएँ, तीन खंड। गायन: सुश्री प्रदक्षिणा भट्ट, राग यमन कल्याण; बड़ा ख़याल “मेरा मन बाँध लीनो रे”, छोटा “रंग दे रंग रेजवा”; तराना-तिरबट; समापन भजन “मोहन की राधा”। संगत: हारमोनियम श्री चैतन्य भट्ट; तबला रतलाम श्री तल्लीन त्रिवेदी। पुष्पगुच्छ: संचालक श्री एन.पी. नामदेव, उप संचालक डॉ. पूजा शुक्ला। चित्र संध्या का फ्रेम है, 14 अंचल एक साथ नहीं।

12 मिनट का पाठ

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